Monday, April 13, 2020

ये 5 तरीके अपनाकर नींद के लिए इस्तेमाल होने के बजाए नींद को खुद के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं आप

नींद को लेकर अक्सर डांट लगाई जाती है, हिदायतें दी जाती हैं लेकिन इसे समझने की कोशिशें कम ही होती हैं...
सोने को लेकर अक्सर बहुत बातें होती हैं. बहुत से लोगों का इस पर कोई अधिकार नहीं होता. कई लोग ऐसे होते हैं जो पढ़ने की कोशिश करते हुए अक्सर सो जाते हैं. कई बार लोग परेशान दिखते हैं कि उन्होंने क्या-क्या चीजें अगले दिन करने को सोच रखी थीं लेकिन अपनी नींद के चलते नहीं कर सके. इसलिए सोने पर मेरे अनुभवों की बात बताता हूं.

एक बात तय है कि नींद एक बायलॉजिकल प्रक्रिया है. जाहिर है इसकी बायलॉजी के बारे में मैं कोई सुझाव नहीं दे सकता. लेकिन असमय सोने, टूटी-टूटी नींद सोने और कम से कम सोकर ज्यादा से ज्यादा काम करने के बारे में सुझाव दे सकता हूं. लेकिन इन सुझावों से पहले मैं अपनी नींद की प्रैक्टिस के बारे में कुछ विचार साझा करना चाहूंगा.

नींद कोई बुरी चीज नहीं, ईश्वर की ओर से आपकी 'डेली फ्री सर्विसिंग' का तोहफा

मैं एक ऐसे परिवार का सदस्य रहा हूं जो आजीवन 5 से साढ़े 5 के बीच उठता आया है. ऐसे में बचपन से 16-17 साल की उम्र तक मुझे भी 6 बजे तक उठना ही पड़ता था. जिसके बाद मुझे पढ़ने के लिए बिठा दिया जाता और मैं फिर सो जाता. इस पूरे दौर में हम रात में 10 से 11 बजे सो जाते थे यानि इस दौरान मैं करीब 7 घंटे की नींद ले पाता था. मैं ज्यादातर साउंड स्लीपर था यानि एक बार सोया तो सीधे सवेरे उठा. लेकिन 18 साल की उम्र होने तक चीजें बदलीं और मैंने नींद को नियंत्रित करने के बारे में सोचा. ऐसा पढ़ाई और सीखने को ज्यादा समय देने के लिए किया गया था.

किशोरावस्था में 7-साढ़े 7 घंटे सोना मुझे बुरी बात नहीं लगती लेकिन 18 साल की उम्र के बाद भी अगर आप रोज़ इतना सोते हैं तो आप रोज़ के हिसाब से अपने एक से डेढ़ घंटे का नुकसान कर रहे होते हैं. आप 6 घंटे सोकर भी काम चला सकते हैं. अगर आप की उम्र 18 से 50 के बीच है और आप रोज़ 7-8 घंटे या उससे ज्यादा सो रहे हैं तो एक बात तय है कि या तो आप जानबूझकर इतनी देर बिस्तर में पड़े रहना चाहते हैं या कई बार उठकर फिर सो जा रहे हैं

आगे बढ़ने से पहले एक बात और समझ लें कि नींद कोई बुरी चीज नहीं है. यह आपके फायदे के लिए ही है. यह आपको तरोताजा करती है. आपके दिमाग में रोज़ भरने वाले कचरे की सफाई करती है. आपकी दिमागी और शारीरिक फंक्शनिंग सही करती है बल्कि सीधे तौर पर कहें तो यह ईश्वर की ओर से आपकी शारीरिक मशीन को दी गई 'डेली फ्री सर्विसिंग' है. लेकिन वर्तमान दौर में अगर आप ज्यादा से ज्यादा सोते हैं तो आप अपने को कई हुनर सीखने, कई बातें जानने या कई काम कर पाने से महरूम कर रहे होते हैं. इसलिए नींद का दुश्मन नहीं बल्कि दोस्त होते हुए भी मैं चाहता हूं कि कम से कम नींद में अपना काम चलाया जाए.


तो अगर आप की उम्र 18 से 50 साल के बीच है और आप 7 से 8 घंटे या उससे ज्यादा सो रहे हैं तो आप इस तरह से अपनी नींद को मैनेज कर सकते हैं. जो भी तरीके मैं यहां लिख रहा हूं वो सारे ही मैंने खुद पर आजमाए हैं-

1. जरूरी नहीं कि आपका 6 घंटे सोकर काम चल जाए. कम से कम सोना उतना सोना है, जितने में आपको सवेरे उठने के बाद नींद न आती रहे, उतना है आपके लिए कम से कम सोना. कम से कम कितना सोकर काम चलाया जा सकता है, इसके लिए मैंने 2011 में एक तरीका ईजाद किया था. मसलन आप रोज़ 8 घंटे सोते हैं और सीधे तौर पर कहें तो मसलन 12 बजे सोकर 8 बजे जागते हैं तो आप 8 बजे का अलार्म लगाने के बजाए 07:58 का अलार्म लगाइए और कोशिश करके दो मिनट पहले जाग जाइए. अगले दिन 07:56 का अलार्म लगाइए, उसके अगले दिन 07:54 का.

यकीन मानिए ऐसे रोज़ दो मिनट पहले उठने से न ही आपकी नींद पर कोई असर होगा और न ही आपके शरीर पर. इस तरह से आप चाहें तो अपनी नींद को 1 महीने में 8 से 6 घंटे पर ला सकते हैं. लेकिन अगर आपको 6 घंटे सोने से सवेरे भी नींद आ रही है तो आपको इसी क्रम में बढ़ाकर भी चेक कर लेना चाहिए कि इससे कितने मिनट ज्यादा सोऊँ कि सवेरे नींद न आए. नींद की क्वालिटी पर भी निर्भर करता है कि आप कितनी देर सोएं. ऐसे में पूरी कोशिश करें कि रात में कोई आपको डिस्टर्ब न करे, न उठाए. और अगर आपकी नींद रात में कई बार खुलती हो तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.

2. ऊपर वाले क्रमिक तरीके से अलग है इंस्टेंट तरीका. आपको सीधे 8 घंटे की नींद से साढ़े 6 घंटे की नींद पर अलार्म लगाकर उठ जाना चाहिए. यह थोड़ी मुश्किल बात होगी. लेकिन अगर आप ऐसा लगातार 3-4 दिन करने में सफल हो जाते हैं तो आपकी आंख रोज उतने ही समय खुलनी शुरू हो जाएगी. इस कदम को उठाने में अधिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है और मैं इसे अपनाने पर बहुत जोर नहीं देता लेकिन मैंने जैसे ऊपर के तरीके को खुद पर आजमाया है, इसे भी आजमाया है और दोनों ही सफल रहे हैं.

3. तीसरा तरीका है दो नींद का तरीका. लेकिन इसे सिर्फ खुद का व्यापार करने वाले और स्टूडेंट्स ही अपना सकते हैं. यह तरीका हमारी सभ्यता में पुराने समय से मौजूद रहा है. इसके मुताबिक नींद को दो भागों में तोड़ दिया जाता है. एशियाई सभ्यताओं में जल्दी जागने का महत्व रहा है. बहुत सवेरे से ही लोग अपने काम-धंधे शुरू कर देते हैं. आप आज भी उत्तर भारत के गांवों में जाएंगे तो देखेंगे कि महिलाएं 12 बजे तक कुछ न कुछ काम में लगी रहती हैं और फिर सवेरे ही 5 बजे उठकर काम शुरू कर देती हैं. शहरों और कस्बों में भी छोटे दुकानदार दोपहर के दो-तीन घंटे दुकानें बंद कर नींद लेते हैं. चीन में तो कई ऑफिस में भी यह नीति लागू है.
आप भी ऐसे ही रात में 4.5 से 5 घंटे की नींद लेकर बाकी 1.5 से 2 घंटे की नींद दिन में ले सकते हैं लेकिन दोनों ही नीदों का समय नियत रखें वरना इसमें खलल पड़ेगा. यह बढ़िया तरीका है, मैंने कई दिन अपनाया और आदत पड़ जाने पर इसका अच्छा असर रहा. लेकिन ध्यान रखें कि नींद के दो से ज्यादा टुकड़े न करें और एक टुकड़ा कम से कम 5 घंटे के आसपास जरूर रहे.

4. नींद एक बायलॉजिकल प्रक्रिया है इसलिए हमारी बायलॉजिकल क्लॉक के साथ सिंक होती है. हम जिस समय उठते हैं, उसी समय हमारी आंखें रोज़ खुलनी शुरू हो जाती हैं जब तक सोने के समय में या नींद के दौरान कोई खास व्यवधान न खड़ा हो. ऐसे में कोशिश करें कि एक नियत समय सोएं भी. रात में मोबाइल न चलाकर अपने दिमाग और आंखों को कम से कम स्ट्रेस दें ताकि कम से कम नींद से आपकी सर्विसिंग हो सके. मेरे लिए सोने जाते हुए कोई हल्का पॉडकास्ट या म्यूजिक सुनना अक्सर फायदेमंद रहा है, आप भी इसे ट्राई कर सकते हैं.

5. सोने से पहले आप घर या किसी खास के नंबरों के लिए अलग कॉलरट्यून लगाकर, अपने फोन को साइलेंट पर भी कर सकते हैं. ताकि घर जरूरी फोन के अलावा कोई और आपको डिस्टर्ब न करे. आप भी किसी को देर रात फोन न करें. सोने से पहले यह जरूर सोच लें कि कल करने के लिए आपके पास क्या-क्या जरूरी काम हैं और दिमाग में उनके लिए एक खाका बना दें कि किस समय, क्या काम करना है, इससे भी आपको जल्दी और एक बार अलार्म बजते ही उठने में मदद मिलेगी. लेकिन कितने भी जरूरी काम हों, उतनी नींद जरूर लें, जितनी आपको जरूरी लगती है.

(नोट: आप मेरे लगातार लिखने वाले दिनों को ब्लॉग के होमपेज पर [सिर्फ डेस्कटॉप और टैब वर्जन में ] दाहिनी ओर सबसे ऊपर देख सकते हैं.) 

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